छोटी सी कहानी से
अनगिनत कहानियाॅं…
ढेर सारे किरदार
उनके तजुर्बे
उनकी नज़र
नज़रिये हमारे भी!
हर शाम छह बजे
खुलती है एक खिड़की
और झॉंकते हैं हम
किसी नई दुनिया में।
भागते-दौड़ते शहर में
कोई है जो थोड़ा रुककर
सिरे कहानियों के पकड़कर
हमें भी थमने को कहता है…
यहॉं बात हो रही है एक ऐसे व्हाट्सऐप ग्रुप की, जो कई मायनों में अनोखा है। खा़सकर तब, जबकि व्हाट्सऐप पर बस आपको सुबह-शाम सुप्रभात, नैतिक शिक्षा, सेहत के अजीबोगरीब नुस्खे़ और तमाम तरह की जानकारी (यह और बात है कि उसके सही या ग़लत होने की कोई पुष्टि नहीं होती) मिल रही होती है।
पिछले लगभग छह महीने से लगातार हर शाम ठीक छह बजे एक कहानी साझा की जाती है और फिर उस पर सदस्य अपनी राय देते हैं, अपने विचार साझा करते हैं। हर किसी को आजा़दी होती है कि वह बेझिझक, बिना यह सोचे कि ‘कोई क्या सोचेगा’, अपनी बात रखे। कहानी के पहलुओं पर विचार-विमर्श होता है और मजे़ेदार बात यह है कि इस समूह में हर उम्र के, हर पेशे के लोग शामिल हैं। पढा़ई करने वालों से लेकर पढ़ाने वालों तक और इंजीनियरिंग, सीए से लेकर अपना व्यवसाय करने वालों, घर से काम करने वालों और घर की देखभाल करते हुए अपने पढ़ने के शौक को पूरा करने वालों तक।
जा़ाहिर है कि अब यह सवाल उठेगा, यह उत्सुकता जागेगी कि आख़िर वह कौन है, जिसने इस तरह की पहल करने की बात सोची और जो लगातार, बिना किसी विराम के हर रोज़ कहानी लेकर हाज़िर हो जाता है? कौन है, जो तकरीबन तीन सौ लोगों के इस समूह को कुशलता, बड़ी समझदारी के साथ जोड़े रखता है? इस शख्सियत का नाम है, अपर्णा। लगभग तीन दशकों से पोस्ट प्रोडक्शन वीडियो एडिटर के तौर पर काम करने वाली अपर्णा अपनी इस भूमिका को भी बेहतरीन ढंग से निभाती हैं। किताबों से, कहानी-कविताओं से गहरा लगाव रखने वाली अपर्णा कई बुक क्लबों का हिस्सा रह चुकी हैं और उनका कहना है कि भागदौड़ भरी ज़िंदगी में बहुत बार तय समय पर किताबों को पूरा कर पाने में मुश्किल होती है और दबाव सा बना रहता है, इसलिए उन्हें यह ख़याल आया कि क्यों न हर रोज़ एक कहानी पढी़ जाए और पढ़ने की आदत को बढा़वा दिया जाए! इसी ख़याल का नतीजा है, यह ‘द डेली स्टोरी सर्कल’।
जैसा कि नाम से जा़हिर है, इसमें अंग्रेज़ी में कहानियॉं साझा की जाती है और उनमें मूलतः अंग्रेज़ी में लिखी गई कहानियों से लेकर दुनिया भर की और भारत की विभिन्न भाषाओं में लिखी कहानियों के अंग्रेज़ी अनुवाद भी शामिल होते हैं।
सदस्य अंग्रेज़ी या हिंदी में अपनी राय साझा कर सकते हैं।
जहॉं इतनी बड़ी तादाद में लोग हों, वहॉं मतभेद होंगे, असहमतियॉं भी सिर उठाऍंगी, लेकिन अपर्णा की परिपक्वता है कि वह बडी़ समझदारी से मध्यस्थता करती हैं और सदस्य भी शिष्टतापूर्वक, सभ्य तरीके से अपनी बात रखते हैं। सप्ताह में दो दिन सदस्य अपनी पसंद की कहानी साझा कर सकते हैं और उस दिन विचार-विमर्श की डोर भी अपने हाथों में ले सकते हैं।
उम्र जो भी हो, उपहार पाना हर किसी को भाता है और अपर्णा सबका उत्साह बढ़ाने के लिए हर महीने एक सदस्य को (जिसका चुनाव पारदर्शिता से किया जाता है) अपने हाथ से लिखी चिट्ठी के साथ उसकी पसंद की किताब भेजती हैं। इसके अलावा उस महीने कहानी साझा करने वालों को भी उपहार भेजती हैं।
सोशल मीडिया के ज़माने में जब काफ़ी कुछ बहुत उथला महसूस होता है, एक ऑनलाइन जमावड़ा है जो हर शाम कहानी पढ़ने को ठहरता है, अल्फ़ाज़ के समंदर में डुबकी लगाता है और अपनी राय को भी बाकी सदस्यों के साथ साझा करता है।